Tuesday, April 9, 2019

लद्युकथा ~ नई परिपाटी - अंजू खरबंदा

"सामान की लिस्ट तैयार हो गई ! पांच किलो फूल याद से लिख लो । मंदिर मे काफी लोग आयेगे फूल कम न पड़े ।" सुरेश जी ने सारी व्यवस्था पर नजर डालते हुये कहा ।

"पापा !  फूल दादी की फोटो पर चढ़ाने के बाद उन फूलो का क्या करेंगे ?" लक्षित ने उत्सुकता से पूछा ।

"ये कैसा प्रश्न ! जाकर किसी नदी मे बहा देंगे बेटा ।" सुरेश जी ने थोड़ा अचंभित होते हुये जवाब दिया ।

"तो नदी प्रदूषित नही होगी इससे ?" लक्षित का बालमन फिर प्रश्न कर बैठा ।

"पर बेटा पुष्पांजलि के बिना धर्म कर्म कैसे पूरा होगा ।" सुरेश जी ने उसके गालों पर हल्की चपत लगाते हुये उत्तर दिया ।

"पापा हम पुष्पांजलि के स्थान पर गेहूँ चावल अर्पित करें तो !!!" जिझासु लक्षित ने पापा की ओर देखते हुये पूछा ।

"गेहूँ चावल अर्पित  !!! मतलब  !!!!"
सुरेश जी हैरानी से लक्षित की ओर देखते हुये बोले ।

"मतलब दान किया गया गेहूँ चावल हम जरुरतमंदों में बांट देंगे जिससे उनका भी भला होगा ।" लक्षित ने अपनी बात को समझाते हुये कहा ।

"हम पशु पक्षियों को भी तो ये अनाज खिला सकते है । सोचिये दादी की आत्मा को कितना सुकून मिलेगा ।"
इतनी देर से चुप बैठी नन्हीं तृप्ति बोल उठी -

".....और नदियों को मिलेगी प्रदूषण से मुक्ति !!!"